1993 धमाको  के आतंकी  की फांसी की सजा माफी मांगने वाले “नसीरुद्दीन शाह” को भारत में रहने से डर लगता है

1993 धमाको के आतंकी की फांसी की सजा माफी मांगने वाले “नसीरुद्दीन शाह” को भारत में रहने से डर लगता है

जिस 1993 मुम्बई बम्ब धमाके में 257 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी, उसके जिम्मेदार आतंकवादी याकूब मेमन की फांसी की माफी के लिए आगे आये थे बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह।

बॉलीवुड कलाकारों में देखा जाए तो अक्सर मुस्लिम कलाकारों को ही हिंदुस्तान में रहने से दिक्कत हो रही है. वो अक्सर हिंदुस्तान के संविधान और हालातों पर सवाल खड़े करते आये हैं. बॉलीवुड में अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा पाकिस्तान परस्ती देखने को मिलती है. किसी ना किसी तरीके से भारत में बन रही फिल्मों में पाकिस्तान का नाम और  वहां के कलाकारों को जबरदस्ती फिल्म में घुसाया जा रहा है.

 

ज्यादातर मुसलमान कलाकारों नें ही भारत के संविधान और व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हमें इस देश में रहने में अब डरने लगा है. उनके बच्चों के लिए डर लगने लगा है इसमें मुख्य नाम हैं आमिर खान, शाहरुख खान और अब नसीरुद्दीन शाह का बयान आया है.

जैसा आमिर खान नें कहा था कि उनको भारत देश छोड़ने का दिल करता है, भारत में डर का माहौल है उनके बच्चों के लिये डर का माहौल है. अब ये सब नसीरुद्दीन शाह कह रहा है. उनका कहना है कि भारत देश में डर का माहौल है उनको उनके बच्चों के लिए डर है, लेकिन हम आपको बता दें कि नसीरुद्दीन शाह एक कट्टर मुस्लिम हैं जो अपने आप को सैकुलर बताते आये हैं. वो एक तरफ कह रहे हैं की उन्होंने अपने बच्चों को धर्म की तालीम नही दी, तो वह दूसरी तरफ वो कह रहे हैं कि उन्होंने अपने बच्चों को कुरान की आयतें पढाई हैं. कहीं न कहीं तो नसीरुद्दीन शाह नें भी अपने बच्चे को कट्टर इस्लामिक विचारधारा वाले इंसान बनाने का प्रयास किया है.

नसीरुद्दीन शाह नें कहा कि एक गाय के पीछे पुलिस वाले को मार दिया गया. यह बात उन्हें मालूम होनी चाहिए कि भारत में गाय को एक गाय नही, बल्कि गाय माता का दर्जा दिया जाता है. हर साल बहुत से गो रक्षक गो तस्करों द्वारा मार दिए जाते हैं जबसे भारत में भाजपा की सरकार आयी है तब से बॉलीवुड के मुसलमान कलाकारों को एक दम से डर लगने लगा है और भारत में भाजपा सरकार आने पहले बहुत सी घटनाएं हुई हैं तब इनको कभी डर नही लगा, ये घटनाएं आज भी रही हैं लेकिन इनको डर नही लग रहा, क्योंकि इनका डर एक साजिश है जो किसी मुख्य चुनाव से पहले सामने आता है जिनके बारे में आपको हम बताने जा रहे हैं

(1) 1984 सिख दंगो में नसीरुद्दीन शाह को डर नही लगा- राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार के समय इंदिरा गांधी की मौत का बदला लेने के लिए राजनैतिक लोगों नें दंगा किया और 3000 निर्दोष सिखों को मार दिया गया, जिसमें आज एक कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद भी हुई है लेकिन उस समय नसीरुद्दीन शाह को डर नही लगा.

(2) कश्मीर दंगा (1986) – इस दंगे में नसीरुद्दीन शाह को डर नही लगा, यह दंगा कश्मीर में मुस्लिम कट्टरपंथी द्वारा कश्मीरी पंडितों को राज्य से बाहर निकालने के कारण हुआ था. इस दंगे में 1000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गयी थीं और कई हज़ार कश्मीरी पंडित बेघर हो गये थे.

(3) 59 कारसेवकों की ट्रेन में जलाकर हत्या- वैसे तो देश में कई दंगे हुए, लेकिन गुजरात दंगे को देश के सबसे भयंकर दंगे के रूप में देखा जाता है. इसकी शुरुआत 2002 में हुई थी, जब कारसेवक अयोध्या से गुजरात साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से लौट रहे थे. इसी बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने इस ट्रेन की कई बोगियों को गोधरा में जला दिया. इस घटना में 59 कारसेवकों की मौत हो गई लेकिन नसीरुद्दीन शाह को डर नही लगा.

 

(4) 26/11 आतंकी हमला- 29 नवम्बर 2008 को बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा और प्यारे देश पाकिस्तान नें ताज होटल के ऊपर आतंकवादी हमला करवाया था, जिसमें 174 लोग मारे गए थे. इस हमले में पाकिस्तान से भेजे गए मुसलमान आतंकवादियों ने चुन-चुन कर लोगों को मारा लेकिन नसीरुद्दीन शाह को डर बिल्कुल नही लगा.

(5) डीएसपी अयूब पंडित की तालिबानी तरीके से हत्या– कश्मीर में जब डीएसपी अयूब पंडित जामिया मस्जिद के बाहर अपनी ड्यूटी पर थे, तब मस्जिद से निकली भीड़ नें उनको पीट-पीट कर इसलिए मार दिया, क्योंकि उनको लगा अयूब पंडित हिन्दू है. लेकिन उस समय नसीरुद्दीन शाह को डर नही लगा.

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