BJP के इन 3 बड़े राज्यों के 2018 विधानसभा चुनाव हार जानें के ये 3 मुख्य कारण थे पढ़ें जरुर

इस बात में कोई शक नही जबसे केंद्र में मोदी सरकार हआई है, और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में BJP की सरकार रही है, तब-तब देश और राज्यों में बहुत तेजी से विकास भी हुआ है. 2014 के बाद तो भारत के विकास की गति बहुत तेजी से आगे बढ़ी, मोदी सरकार नें कांग्रेस के 70 सालों जितना विकास और काम सिर्फ 4 साल में कर दिखाया लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) नजदीक आते-आते मोदी सरकार कमजोर होने लगी और पंजाब,कर्नाटक के बाद 3 बड़े राज्यों में जिसमें राजस्थान,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में चुनाव हार गई .

इन 3 बड़े राज्यों में हार के थे ये 3 मुख्य कारण जिसकी वजह से BJP चुनाव हार गई

1. SC/ST कानून में संशोधन

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट नें दलित उत्पीड़न के खिलाफ बनाये हुए कानून में संशोधन किया था. बहुत से स्वर्ण झूठे आरोपों की वजह से जेल में जा रहे थे. कोर्ट में दलित उत्पीड़न के बहुत से नकली मामले जा रहे थे. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट नें कानून में बदलाव करते हुए ये पक्का किया की आरोपी को जमानत कोर्ट से नही थाने ही मिल जाएगी, डीएसपी लैवल की जांच होगी, 7 दिन में जांच पूरी की जाएगी और बिना जांच के गिरफ्तारी नही की जाएगी.

कहीं ना कहीं कोर्ट नें ये एक दम सही किया था. लेकिन इस फैसले पर सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ congress नें आवाज उठाई, कांग्रेस नें इसे दलितों पर अत्याचार बताया बहुत सी अन्य पार्टियों नें अपने दलित वोट बैंक पक्का करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जाना ठीक समझा और इस विरोध के दबाव में भाजपा भी आ गयी, दूसरी पार्टियों के सुर में सुर BJP नें भी मिलाया और उसके बाद संसद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कानून लाते हुए SC/ST Act को पहले जैसा बना दिया.

भाजपा के इस कदम के बाद भाजपा का परम्परागत वोटर नाराज हो गया जिनमें ब्राह्मण, राजपूत, अग्रवाल समाज तथा मध्य वर्ग भी नाराज हो गया, इन लोगों नें भाजपा को वोट नही डाला मौके का सही फायदा कांग्रेस नें उठाया स्वर्णों के खिलाफ SC/ST कानून को दबाव डालकर फिरसे उसके असली रूप में करवाने वाली कांग्रेस नें सवर्णों को BJP के खिलाफ भी भड़काया, यहां कांग्रेस का कार्यकर्ता, आईटी सेल बहुत अच्छा खेल गया और भाजपा 3 राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान ,छत्तीसगढ़ में चुनाव हार गयी.

2. 15 साल का राज करने के बाद विरोधाभास

रमन सिंह जी की छतीसगढ़ BJP सरकार और मध्यप्रदेश शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार नें 15 साल तक लगातार इन राज्यों में राज किया है. जिसकी वजह से लोग बदलाव चाहते थे. वहां 15 साल से लोगों में हल्का-2 विरोध अंत में आकर बहुत ज्यादा हो चुका था. इसी वजह से लोगों नें अपना वोट बदला और छत्तीसगढ़ ,मध्यप्रदेश में भाजपा हार गई, और जहां तक राजस्थान की बात है वहां 5 साल बाद सरकार बदल जाती है तो यहां हम इसे ना तो चौकीदार की हार कह सकते हैं और पप्पू की जीत ये वैसे भी नही है. क्योंकि उनके नाम पहले ही 31 चुनाव हारने के रिकॉर्ड दर्ज है.

3. NOTA Vote होना

NOTA (None of The Above) का मतलब होता है किसी भी पार्टी को वोट नही, लेकिन उसकी गिनती जरूर होगी जिसको नोटा नाम दिया गया है. Sc/st एक्ट में बदलाव में BJP नें भी सहयोग दिया था जिसकी वजह से स्वर्ण समाज नाराज था, स्वर्ण समाज और मध्य वर्ग ही भाजपा का पक्का वोट बैंक है, लेकिन इस बार इन लोगों नें नाराज होकर नोटा पर वोट किया जिसकी वजह से भाजपा को 3 राज्यों में करीब 30 सीटों पर नोटा की वजह से ही हार मिली. नोटा करवाने के लिए सोशल मीडिया पर भी अलग से कैंपेन चलाया गया था लेकिन लेकिन भाजपा का एक दम सुस्त और निकम्मा आईटी सेल इसे काउंटर नही कर सका, और नोटा की वजह भाजपा को नुकसान हुआ तथा भाजपा 3 राज्यों में हार गयी.

यहां अगर देखा जाये तो भाजपा को अपने दलित वोट बैंक को, तो वैसे भी आज BJP के पास कुछ खास दलित वोटबैंक नही है, लेकिन उनको, उनको खुश करने के लिए अपने स्वर्ण वोट बैंक को भाजपा ने नाराज किया. जिसकी वजह स स्वर्ण समाज नें वोट नही किया. भाजपा का आईटी सेल भी बहुत कमजोर और सुस्त है जो ना तो नोटा कैंपेन (NOTA Campaign) को रोक पाया ना उसका मुकाबला  कर पाया और ना ही राफेल जैसे झूठे मामले को काउंटर कर पाया नतीजा भाजपा की हार हुई.